नाम के लिए हत्या

विनय पत्रिका अब तो नाम लोगे आलोचक सिर्फ हिंदी के लिए देह धारण करनेवाले आज कितने होंगे। जी हाँ, मात्र हिंदी को समर्पित एक कवि महान कवि, कहानीकार, समीक्षक, संपादक, प्रवक्ता त्तर प्रदेश में हैं किंतु बेहद दुखी और परेशान हैं। अपनी उपेक्षा से तंग आकर उन्होंने अपना नाम... [पूरी पोस्ट]
writer बोधिसत्व
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[22 Apr 2009 15:31 PM]

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