वो जो न था आदर्श तुम्हारा...

संवेदना अप्रैल 09 तन्हा बैठा सोच रहा हूं वो जो न था आदर्श तुम्हारा आज वही एक आम सा लड़का शीशों वाले उस कमरे में पास तुम्हारे बैठा होगा लंबी और घनी ज़ुल्फों में जूही की कलियां अटकाए और गुलाबी से होठों पर एक सच्ची मुस्कान सजाए अपनी जीत पे नाजां नाजां तुम उससे... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कुमार वर्मा
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[22 Apr 2009 14:24 PM]

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