पहले था ढेर सारा अकेलापन (.)

हिमाल : अपना-पहाड़ पहले था ढेर सारा अकेलापन (.) जैसे एक बंद कमरा हो और मैं उसमें क़ैद हूं और मेरे होठों पर किसी ने रख दी है चुप की उंगली ।। ऐसा नहीं था कि मैं बोल नहीं सकता था पर वहां था ही नहीं कोई मेरे इर्द-गिर्द कोई अपना सा बार-बार कुछ शब्द गले से उतरकर होठों के दरव... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट
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[22 Apr 2009 11:05 AM]

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