पाप

KAVYANCHAL सिर्फ मतलब के लिए हर चाल चलना पाप है हर दफ़ा दर देखकर मजहब बदलना पाप है शायरी, दीवानगी, नेकी, इबादत, मयक़शी और राहे-इश्क़ में गिर कर संभलना पाप है काश बच्चों की तरह हालात भी ये जान लें ख़्वाहिशों की तितलियों के पर मसलना पाप है दौर इक ऐसा भी था, जब झू... [पूरी पोस्ट]
writer चिराग जैन CHIRAG JAIN
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[31 Mar 2009 11:40 AM]

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