डूब गई जिंदगी क्यो ज़हर में

duniyakalamkinazarse डूब गई जिंदगी क्यो ज़हर में होता कोई अपना इस शहर में चांदनी के पंख कट गए होंगे इतना अँधेरा न था इस दहर में यह मौसम पगला गया कैसे धुल एक भी नही इस शज़र में सर पिटती रही होंगी हवाए डूब गया सितारा किस नज़र में यह अचानक कारवा को क्या हुआ रोने की बात न थी... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul kundra
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[22 Apr 2009 05:00 AM]

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