नज्म और आवाज़ का जादू ..गुलजार -अमृता

अमृता प्रीतम की याद में..... तेरी नज्म से गुजरते वक्त खदशा रहता है पांव रख रहा हूँ जैसे ,गीली लैंडस्केप पर इमरोज़ के तेरी नज्म से इमेज उभरती है ब्रश से रंग टपकने लगता है वो अपने कोरे कैनवास पर नज्में लिखता है , तुम अपने कागजों पर नज्में पेंट करती हो -गुलजार अमृता की लिखी नज्म हो... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
views
44
upvote
6
downvote
0
rating
6
comments
21
[22 Apr 2009 03:14 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix