तुमसे पहली मुलाक़ात और तुम्हारी वो मुस्कराहट

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति बुझता नहीं चिराग मोहब्बत का जब से जला है इस सीने में कमबख्त दिल आज भी उसके नाम पर धड़कता है कुछ मुलाकातें अपना असर छोड़ जाती हैं ...जो इस दिल पर हमेशा अपना कब्जा किये रहती हैं ....यादें भी ना खूब होती हैं ...बस दिमाग की हार्ड डिस्क में एक बार स्टोर हो... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :

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[21 Apr 2009 15:29 PM]

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