मैं कोनसा भाषण सुनने जा रही हूँ......
पानी के छींटे लगते ही मैं हडबडा कर उठ बैठा. इससे पहले कि गुस्से में मेरा तीसरा नेत्र खुलता दोनों नेत्रों के सामने श्रीमतीजी का चेहरा आ गया. बस इतना काफी था, तीसरा नेत्र उनींदा ही रह गया। एक हाथ मैं पानी का लोटा और दूसरा हाथ कमर पर रखे घर की महारानी ख...
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शिवराज गूजर.
व्यंग्य बाण
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[21 Apr 2009 10:58 AM]



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