मुझको उस शाखे गुल से प्यार नही
मुझको उस शाखे गुल से प्यार नही जिस पे बस गुल ही गुल हो खार नही मौत का ऐतबार है मुझको जिंदगी तेरा ऐतबार नही दोस्त दुश्मन सभी तो छोड़ गए अब किसी का भी इन्तिज़ार नही रुसवा हो जाता वरना दुनिया में बच गया कोई राजदार नही कट ही जायेगी जिंदगी ऐ अश्क गम न कर को...
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Rahul kundra
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[21 Apr 2009 05:35 AM]



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