कारोबारी हिंदी और साहित्यिक हिंदी.
स्थूल रूप से आकलन किया जाए तो वर्तमान में हिंदी के कुल तीन प्रमुख रूप हैं जो कारोबारी हिन्दी, साहित्यिक हिंदी और आम बोलचाल की हिन्दी है। हिन्दी इतिहास के पन्नों को पलटने पर यह स्पष्ट होता है कि विगत में हिंदी कामकाज की भाषा नहीं बन सकी थी किन्तु हिंद...
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धीरेन्द्र सिंह
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[21 Apr 2009 00:23 AM]



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