चुनावों के बीच एक बात कहनी है।

तलाश नेताजी चुनावों का शंखनाद हो चुका नेताजी की नींद अब टूट चुकी। तैयार हैं सब अब अपने अपने हथियारों से कोई वादों से बहका रहा, कोई भावनाओं को भड़का रहा। जिसे देखो वही बड़ी-बड़ी बातें करता हैं पर अपने ऐशो-आराम का पूरा ख्याल भी रखता हैं। धूल से पैर ना सन जाए इ... [पूरी पोस्ट]
writer सुशील कुमार छौक्कर
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[20 Apr 2009 23:58 PM]

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