मेरी पीं पीं करने वाली गुड़िया
बिटिया बड़ी हो रही है.
अब वो पीं पीं करने वाले खिलौनों से नहीं खेलती.
अब उसे चाहिए नए कपडे, गहने और गुडिया.
कल ही की बात है कि हथेलियों में समा जाती थी.
शायद कल गोद में भी न समायेगी.
रह जायेगी यही यादें मेरे साथ.
जब कभी दूर वो चली जायेगी.
उन्ही यादों...
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कौतुक
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[20 Apr 2009 23:10 PM]



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