गुरु प्राप्ति - एक लक्ष्य

मंत्र-तंत्र-यंत्र विज्ञान मनुष्य अपने आप में अधूरा और अपवित्र है। वह अपने आपको पूर्ण कहता है, मगर पूर्ण है नहीं, क्योंकि उसके जीवन में कोई न कोई अधूरापन रहता ही है, धन है तो प्रतिष्ठा नहीं, प्रतिष्ठा है तो पुत्र नहीं है, पुत्र है तो सौभाग्य नहीं, सौभाग्य है तो रोग रहित जीवन न... [पूरी पोस्ट]
writer Vikram
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[20 Apr 2009 19:30 PM]

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