दुआ
बचपन से दुआएँ साथ चलती हैं आँगन को बुहारती टीन के डिब्बे में आम की पौध सी पलती हैं मेरे हाथ की लकीरों में गली में स्टापू सी खेलती हैं रात में सपनों सी दिन में पूजा के आचमन सी मिलती हैं बाँस के झुरमुट में मेरे तलवे के नीचे धूप सी खिलती है नन्हे पैरों...
[पूरी पोस्ट]
रजनी भार्गव
33
5
0
5
4
[20 Apr 2009 08:35 AM]



Shuffle








