वक्त खड़ा देखता रहा खुले जख्म को.........

मेरे आस-पास चुप सी रात में यादों के रेले में अंदर कुछ तिड़का वो जख्म खुल गये थे जो सिल दिये वक्त ने रेले से एक साया निकला हाथ बढ़ा कर उसने जख्मों से धागा निकाल दिया वक्त खड़ा देखता रहा खुले जख्म को और साया रेले में गुम हो गया... [पूरी पोस्ट]
writer MANVINDER BHIMBER
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[20 Apr 2009 08:24 AM]

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