हम जो अंडे देते थे वे फार्मी थे
रंग बिरंगी चुनर ओढे गाँव से आई गोरी इस क़स्बे को अचरज भरी निगाहों से देखती हुई कभी किसी ठेले वाले कभी गाय से टकरा जाती और हाय राम कहते हुए ख़ुद को संभालती हुई पुनः दुकानों के आगे रखे सामान में खो जाती उसका आदमी एक साथ तीन किलो सूखी लाल मिर्च खरीदने क...
[पूरी पोस्ट]
Kishore choudhary
24
2
0
2
17
[20 Apr 2009 04:58 AM]



Shuffle








