हम जो अंडे देते थे वे फार्मी थे

KISHORE CHOUDHARY रंग बिरंगी चुनर ओढे गाँव से आई गोरी इस क़स्बे को अचरज भरी निगाहों से देखती हुई कभी किसी ठेले वाले कभी गाय से टकरा जाती और हाय राम कहते हुए ख़ुद को संभालती हुई पुनः दुकानों के आगे रखे सामान में खो जाती उसका आदमी एक साथ तीन किलो सूखी लाल मिर्च खरीदने क... [पूरी पोस्ट]
writer Kishore choudhary
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[20 Apr 2009 04:58 AM]

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