देखो रात की सवारी आ रही...
देखो रात की सवारी आ रही... मीठे गीत गुनगुना रही, देखो रात की सवारी आ रही... सांझ के रथ पर हो सवार, चाँद-तारों से कर श्रृंगार... आकाश का बना आँचल, सूर्य को उसमे छिपा रही... देखो रात की सवारी आ रही... अन्धकार से केश लहराएँ, मुख पे चांदनी सजाये... लग रह...
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मीत
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[20 Apr 2009 03:15 AM]



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