निरूतर लौटे संदेश सभी
निरूतर लौटे संदेश सभी " सुनी लगती है ये धरती... अगन ये नभ बरसाता है तुमको खोजे कण कण मे ये मन उद्वेलित हो जाता है... अरमानो के पंख लगा एक स्पर्श तुम्हारा पाने कों सेंध लगा रस्मो की दीवारों मे दिल बैरागी हो जाता है..... हर आस सुलगने लगती है उम्मीद बोर...
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seema gupta
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[19 Apr 2009 22:20 PM]



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