du:swapna

. बड़ी सर्द हैं ये यादें ठिठुरने भी नहीं देती हैं, अक्सर चढ़ जाती हैं सवालों की सीढिय़ां तो जवाबों केपदचाप सुनकर भी उतरने नहीं देती हैं । फिर मैं औकात में आकर उनके दो हिस्से कर देता हूं, खुशनुमा को रजाई बना लेता हूं, स्याह को मफलर सा बांधता हूं करवटों क... [पूरी पोस्ट]
writer durgesh
views
20
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
9
[19 Apr 2009 12:05 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix