हे प्रिये जब तुम साथ मेरे होते हो

मोहन का मन हे प्रिये जब तुम साथ मेरे होते हो कितने ही अफसाने कहते हो होता है मीठा सा अहसास उन तानों में भी जो तुम देते हो विरह वेदना से हो पीडित याद मुझे तुम करते हो जब भी ताने तुम देते थे अब भी ताने तुम देते हो हे प्रिये जब तुम साथ मेरे होते हो क् ‍ या तुम् ‍... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन वशिष्‍ठ
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[19 Apr 2009 06:23 AM]

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