सुनो, मैं नैनीताल बोल रहा हूं-2
इक शहर की आत्म-कथा (इसके पहले हिस्से में हमने नैनीताल शहर के जन्म और फिर यहां अंग्रेज़ों के आगमन की कहानी सुनी। हमने सुना कि कैसे एक शहर कई बार प्रकृति के झंझावातों से जूझा। टूटा, बिखरा और फिर से खड़ा हुआ और बस गया। फिर आगे ये भी सुना कि कैसे अंग्रेज...
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जितेंद्र भट्ट
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[19 Apr 2009 02:12 AM]



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