देखो कितने दूर चले आए हम
मैं चुप था तुमने नाराज़ समझा मैंने सोचा था तुम बुलाओगे मुझको ना तुमने पुकारा ना मैं पलटा देखो कितने दूर चले आए हम फासले बढ़ते ही जा रहे हैं अब मीलों से लगते हैं ।।...
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जितेंद्र भट्ट
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[19 Apr 2009 01:29 AM]



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