क्यों कर ली मोहब्बत

सरपंच हथेली पे तेरा नाम उभारा क्योंकर तुझको नज़रों के समंदर में उतारा क्योंकर तेरा नाम मेरे नाम से मिलता ही नहीं इस तरह नाम तेरा लेके पुकारा क्योंकर मेरी बस्ती के उजाले भी खफ़ा हैं मुझसे चांद तारों को अंधेरों में उतारा क्योंकर इन निगाहों को निगाहों की कोई... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश त्रिपाठी
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[18 Apr 2009 04:39 AM]

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