LOVE STORY # 464: वह जो लाल रंग फैल रहा था, क्रांति का नहीं था

अखाड़े का उदास मुगदर इस श्रृंखला की यह सौवीं कहानी है. इसके बाद 463 कहानियां और इस सरदर्द से निज़ात पाने के लिए. लंदन से एक मित्र ने अपने बहुत अकेले दिनों को बिताते हुए इसे लिखा है. लिखना हम सबके अकेले होने की निशानी है. और अच्छा लिखना बहुत अकेले होने की. अकेले होने के ल... [पूरी पोस्ट]
writer आस्तीन का अजगर
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[18 Apr 2009 03:56 AM]

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