पथ धूलि

परदेश पथ धूलि हूं मैंयुग-युग कुचलती रहीजन्‍मो-जन्‍मों सेगाली सुन रहीपथ धुली हूं मैं।बडी आशा के साथजाना चाहा गगन मेंजगह पावन मेंपर, उतरती फिरधरती परऊंची गाली के साथ।मैं चाहती हूं तुम्‍हारा पासतुम्‍हें चाहती, पर तुझसे दूर रहतीपथ धुलि हूं मैं।युगों के अभिशाप,... [पूरी पोस्ट]
writer Bijen Salam
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[18 Apr 2009 03:12 AM]

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