आपको आपकी रचना कैसी लगी?
हम अक्सर जब भी कुछ लिख कर उठते हैं तो सोचते हैं कि आज हमने बहुत ही धाँसू रचना की है. क्या कहें इतना बड़ा तीर मारा है कि आज तो साहित्य के स्तम्भ उखड़े ही उखड़े. लोग तो बस, क्या कहने हैं. पढ़ते ही झूम उठेंगे. सामने होता तो कहीं हाथ ही न [...]...
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कौतुक
हिन्दीHindiलेखlekh
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[17 Apr 2009 09:39 AM]



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