बचपन में जहाँ और भी हैं...

गुल्लक घटना तीस साल पुरानी है। पिताजी रेल्वे में थे। हम रेल्वे क्वार्टर में रहते थे। क्वार्टर रेल के डिब्बे की तरह ही बना था। गिने-चुने तीन कमरे थे। परिवार में माँ-पिताजी,दादी और हम छह भाई-बहन थे। पहला कमरा दिन में बैठक के रूप में इस्तेमाल होता था। उसी में... [पूरी पोस्ट]
writer राजेश उत्‍साही
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[17 Apr 2009 09:17 AM]

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