सप्त्शी के तालीबानी....

संवेदना संसार किसी भी धर्म के पूज्य ग्रंथोँ, जिन्हें कि न जाने कितने महत अन्वेश्नोपरांत लिखा गया है, को केवल ऊपरी सतही तौर पर पढ़कर, यदि हम शब्द आधारित विश्लेषण करेंगे और उसके विषय में अपना अभिमत स्थिर करेंगे तो यह उस ग्रन्थ और उसके रचयिता के श्रम और उद्देश्य की अ... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना

धार्म आलेख चिंतन

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[17 Apr 2009 08:18 AM]

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