कैसे कैसे हादसे सहते रहे

duniyakalamkinazarse कैसे कैसे हादसे सहते रहे फ़िर भी जीते रहे हसते रहे उसके आ जाने की उम्मीदे लिए रास्ता मुड - मुड के हम तकते रहे वक्त तो गुजरा मगर कुछ इस तरह हम चिरागों की तरह जलते रहे कितने चेहरे थे हमारे आस - पास तुम ही तुम दिल में मगर बसते रहे... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul kundra
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[17 Apr 2009 06:03 AM]

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