चुनाव के मौसम में

तिश्नगी मैंने चुनावी मौसम में यह महसूस किया कि हम किस भारत में रहते हैं। यदि असली तस्वीर से मैं अब तक नावाकिफ था तो इसमें दोष मेरा ही है। मुङो अब लग रहा है कि मैं सच्चाई से मुंह चुराकर चला जा रहा था। आंखें बंद कर लेने से सच बदल तो नहीं जाता! मैं राजनीतिक दलो... [पूरी पोस्ट]
writer अखिलेश चंद्र
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[17 Apr 2009 05:00 AM]

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