जूते और वोट

सहज साहित्य(SAHAJ SAHITYA) रामेश्वर काम्बोज ' हिमांशु ' जूते जूते में गुन बहुत से, सदा राखियो संग । गुण्डे नेता हों जहाँ , वहाँ दिखाए रंग ॥   वहाँ दिखाए रंग,झपट   दुष्टों को मारे । यह घमण्ड का भूत , सिर से तुरन्त उतारे ॥   इसका जोड़ न तोड़ सभी कुछ इसके बूते । परमा... [पूरी पोस्ट]
writer सहज साहित्य
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[17 Apr 2009 03:51 AM]

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