गाली बनते शब्द

भूख सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव बड़े प्यार से मैंने उसे बुलाया था-अरे पप्पू, कैसे हो? और वो भड़क गया. सुबह-सुबह खरी-खोटी सुना दी। ऐसी लताड़ लगाई कि शायद अब इस जन्म में तो मैं पप्पू शब्द अपने मुंह से निकालूंगा ही नहीं। जहां तक मैं जानता था और बरसों से जान... [पूरी पोस्ट]
writer Satyendra Prasad Srivastava
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[17 Apr 2009 01:37 AM]

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