राम की 'व्यक्तिपरिक्षा-2'

RAJ SINHasan....... say बाल्मीकि' के राम राम थे , तुलसी के भगवान राम थे । ' कथा ' सुनायी बाल्मीकि ने ' राम' की , पर मात्र कथा थी ? सीता की व्यथा थी ! संत थे , थे तटस्थ ,वे कवि थे । बस वही कहा , जो घटा , घटा कर नहीं कहा , कविता थी ! तुलसी तो थे संत , राम 'आराध्य' थे । ' धर्म... [पूरी पोस्ट]
writer RAJ SINH
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[16 Apr 2009 21:13 PM]

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