भीड़ में भी "तन्हा"..
पल पल बड़ते कदम, कुछ तेज़ तेज़ कुछ मधम मधम वो चीख वो अंदाज़, क्या मौत इसी को कहते हैं ?? आसमानों में टिमटिमाते दिये जैसे तारे, जो इस तूफान में कुछ धुंधले हो रहे हैं ये बरफ सी ठंडी आह, मासूम बियाबान रात, क्या मौत इसी को कहते हैं ?? याद है ज़िन्दगी भी है...
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Season
21
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5
[16 Apr 2009 14:42 PM]



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