बेतुकी तुकबंदी और मंच की कैद

कच्‍चा चिट्ठा कहानी व्यंग्य लेख नाटक कोई भी विधा हो, सामने कोरा कागज हो और हाथ में लेखनी हो तो कुछ न कुछ बन ही जाता है। उससे भी बढ़िया सामने कंप्यूटर हो तो क्या बात है। दस बार लिखो, दस बार डिलीट करो, कोई सबूत नहीं रहता कि आपने एक पेज लिखने में कितनी बार काटा छाँटा... [पूरी पोस्ट]
writer मथुरा कलौनी
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[16 Apr 2009 12:27 PM]

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