तुम गये कुछ दूर
तुम गये कुछ दूर मन उदास सा हो गया , याद करना याद आना बस ख्वाब सा हो गया , रोज कहते थे चला जाऊ जाउगा एक दिन, यू छोडके के जाना अजीब सा हो गया , न आते लोट के तो हम मन को बहला , लेते कि समीर अब किसी ओर देश का हो गया , याद मे आसूं बहाता मे कहा रह पाता हूं...
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संजय तिवारी ’संजू’
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[16 Apr 2009 03:45 AM]



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