शायद.....सिर्फ एक शब्द या फिर कुछ और....
शायद..........पता नही सिर्फ शब्द भर है.....या फिर पूरी की पूरी ज़िंदगी को रवानगी देने की कोशिश करता कोई अजूबा.......शायद....शायद...शब्द ही ऐसा है.....जिसके पीछे लोग शायद अपनी ज़िंदगी गुज़ार सकते हैं.......सिर्फ इस एहसास को लिए कि शायद कल अच्छा हो.......
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tanu sharma.joshi
शायद....
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[16 Apr 2009 03:38 AM]



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