'अभिलाषाओं' तुम धीरे चलना

हिमाल : अपना-पहाड़ अभिलाषाओं' तुम थम जाओ अपने पंखों को सीमा दो इक जीवन पथ पर दौड़ाओ तुमको देखा है खुले गगन में ऊंचा-ऊंचा उड़ते हो कभी-कभी तो टूट बिखर तेज़ी से तुम गिरते हो ।। 'अभिलाषाओं' तुम रुक जाओ अपनी सांसों पर हाथ रहे इतना चल कि / वापस घर की याद रहे अक्सर होता है द... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट

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[15 Apr 2009 11:29 AM]

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