गर्भभार
एकालापगर्भभारसँभलकर, बहुरिया,त्रिशला देवी के सोलहों सपनों का सचतेरे गर्भ में है.नहीं,दिव्यता का आलोककेवल तीर्थंकरों की माताओं के हीआनन पर नहीं विराजता ;हर बेटी, हर बहूजब गर्भ भार वहन करती हैउतनी ही आलोकित होती है.हिरण्यगर्भ हैहर स्त्री.उसके भीतर प्रक...
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कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[15 Apr 2009 09:25 AM]



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