अंतर्ज्ञान

swati : रेगिस्तान में पड़ रही है बर्फ तन की सीमाओं को जो जान पाती मैं फिर कभी न चाह करती तिनकों की ओक़ पर से ओस चुगने की ................. और मन के जो घेरें हैं असीमित खदेड़ते है मुझको वर्जित जग को पाने की खातिर .............. [पूरी पोस्ट]
writer swati
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[14 Apr 2009 15:38 PM]

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