हुस्न हाजिर है

जिरह हुस्न हाजिर है मुहब्बत की सजा पाने को। पर ये पंक्तियां सुनकर सजा देने के लिए बढ़े पांव जड़ हो जाते हैं। मुझे लगता है... अरे कहां मैं अपनी बात सुनाने में लग गया ! मेरे लगने को मारें गोली, आपको क्या लगता है यह जरूर बताएं... husn hazir.mp3... [पूरी पोस्ट]
writer अनुराग अन्वेषी
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[14 Apr 2009 15:08 PM]

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