प्रेम ये है प्रेम...

संवेदना अप्रैल 09 आग से जले ना, जल से बुझे ना हवा से उड़े ना, तूफां से डरे ना दिल और जां में जमीं आसमां में नाम है जिसका सारे जहां में प्रेम ये है प्रेम प्रेम है पूजा, प्रेम है शक्ति प्रेम है ज्योति, नई अनुभूति प्रेम ही सुर है, प्रेम ही भाषा प्रेम जीवन की है... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कुमार वर्मा
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[14 Apr 2009 14:10 PM]

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