धरती का मोह...आकाश की चाह...रनवे से उड़ान...

काहे को ब्याहे बिदेस.... वो बोला "मैं तुम्हारा रनवे हूँ तुम यहाँ से आकाश में उड़ान ले सकती हो". वो बोली "मेरे पास पंख नहीं हैं" .. "यह लो बादलों के पंख यह तितली के पंखों की तरह रंग बिरंगे नहीं है पर तुम उड़ान ऊँची ले सकोगी".. वो बोली "मेरे पास उड़ने के लिए आत्म विश्वास नहीं है... [पूरी पोस्ट]
writer neera
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[14 Apr 2009 10:08 AM]

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