लाईफ की छुपम छुपाई..

जिंदगी कब लाईफ बन गयी पता ही नहीं चला.. अभी थोडी देर पहले ही तो बचपन मुझे जवानी के घर छोड़ने आया था.. तब जो जीते थे, जिंदगी तो वही थी.. अब जो है उसे तो लोग बाग़ लाईफ कहते है.. पर फर्क दोनों में कुछ भी नहीं.. पहले हम इससे खेलते थे अब ये हमसे खेलती है.... [पूरी पोस्ट]
writer कुश
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[14 Apr 2009 05:16 AM]

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