विलीन
तुम उस खुशबू के समंदर सी हो जो लहर लहर सी उठ कर मुझे किनारे से उठा ले जाती है। मेरी साँसों मे घुल यह महक मेरे पोर पोर तक पहुँचती है। तुम्हारी पहचान है इसमें। मुझ तक यह तुम्हारा नाम बन कर आती है। मैने इसे जिस्म पहनते देखा है। और तुम्हारे जिस्म को खुशब...
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Beji
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[14 Apr 2009 02:36 AM]



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