मेरे सिरहाने उड़नतस्तरी ...
हर सुबह की तरह आज की सुबह नही थी अगर ऐसा कहूँ तो कोई आश्चर्य की बात ना होगी.हालाकि सुबह तो आज भी हुई थी हर रोज अपने माता पिता को नमन कर बिस्तर त्यागता था मगर आज बिस्तर त्याग ही नही पाया कारण ये था के जैसे ही मेरी आँख खुली मेरे सिरहाने एक कुरियर था ,उ...
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"अर्श"
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[14 Apr 2009 02:19 AM]



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