प्रकाश बादल की गजलें
डिप्रैशन में हूँ,परेशान हूँ लज्जित भी। मैंबे जिस भाषा को अपनी कल्पना से भी दूर रखा, उसी भाषा का इसतेमाल करने का आरोप मुझ पर लगाया जाए तो भला एक संवेदनशील व्यक्ति के लिए इससे बड़ी शर्मिंदगी की बात क्या हो सकती है। एक लेखक को लिखने की इतनी बड़ी सज़ा मिलती...
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प्रकाश बादल
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[13 Apr 2009 13:22 PM]



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