"तलाश..."

ये नम हवायें बहुत हैं जख्मी सम्भलकर चलो कहीं ये दर्द न दे जायें, देखने में फूलों की सेज होगें वों अहसास में काटों की चुभन देंगें जो महक मिलने पर दोस्त न समझ लेना वरना रंगीन मुस्कुराहट की सजा देगा वो, निकल के इस माया के सरोवर से अब इक बागबां की तलाश क... [पूरी पोस्ट]
writer Lokendra
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[13 Apr 2009 08:26 AM]

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