नई जूता-क्रांति
इधर, जूतों ने कहर ढाहाया हुआ है। जूता 'असहमति के विरोध' का हथियार बनता जा रहा है। जिसे कुछ नहीं सूझ रहा, वो जूते की चोट पर दूसरे को समझाना चाह रहा है। जूता अब हमारी 'राष्ट्रीय चिंता' का विषय बनता जा रहा है। स्थिति कुछ बदल-सी गई है। कल तक आतंकवाद की म...
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अंशुमाली रस्तोगी
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[13 Apr 2009 01:32 AM]



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