हवा बांधने का दौर
व्यंग्य हवा बाँधने का दौर वीरेन्द्र जैन तुलसी बाबा कह गये हैं कि- क्षिति जल पावक गगन समीरा पंचतत्व मिल बना शरीरा! इन पंच तत्वों से ही मिल कर शरीर बनता है। इनमें से एक तत्व अथार्त पावक की बहुतायत से ये सारे तत्व विखंडित होकर अपने अपने घरों को लौट जाते...
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virendra jain
vyangya
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[13 Apr 2009 01:16 AM]



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